वित्त आयोग ( Finance Commission ) और केन्द्रीय सुचना आयोग ( Central Information Commission )

वित्त आयोग  ( Finance Commission )

  • वित्त आयोग एक संवैधानिक संस्था है।
  • वित्त आयोग का गठन राष्ट्रपति द्वारा प्रत्येक 5 वर्ष पर अनुच्छेद - 280 के अनुसार केंद्र सरकार को वित्तीय मामलों पर सलाह देने के उद्देश्य से किया जाता है।
संरचना:- 5 सदस्यीय ( एक अध्यक्ष + चार सदस्य )
योग्यता:-  वित्त आयोग अधिनियम 1951 द्वारा वित्त आयोग का अध्यक्ष वह व्यक्ति होगा जिसे सार्वजनिक जीवन में पर्याप्त अनुभव होगा।
आयोग के अन्य 4 सदस्यों ने निम्न योग्यताएं होनी चाहिए -

  1. वह उच्च न्यायालय का न्यायाधीश हो या उसकी योग्यता रखता हो।
  2. उसे लेखा एवं वित्त का विशेष अनुभव हो ।
  3. जिसे प्रशासन का विशेष अनुभव हो।
  4. जिसे अर्थशास्त्र का ज्ञान हो।

कार्य :-

  • केंद्र और राज्य के मध्य करो और शुल्को से प्राप्त शुद्ध आगम के बंटवारे के बारे में सिफारिश करना।
  • भारत की संचित निधि से राज्यों को दिए जाने वाले सहायता अनुदान के बारे में सिफारिश करना।
  • पंचायतों और नगरीय निकायों के संसाधनों हेतु राज्य की संचित निधि में वृद्धि के लिए उपाय सुझाना ।
वर्तमान में 15 वित्तीय आयोग गठित हो चुके हैं 15 वित्त आयोग का गठन 2017 में किया गया जिसके अध्यक्ष एन.के. सिंह है।

केंद्रीय सूचना आयोग ( Central Information Commission )


  • केंद्रीय सूचना आयोग की स्थापना 2005 में की गई।
  • यह एक संवैधानिक निकाय नहीं है।
  • यह स्वतंत्र निकाय है जो किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा दर्ज की गई शिकायतों की जांच करता है।

गठन :-

  • इस आयोग में एक मुख्य सूचना आयुक्त व अन्य 9 सूचना आयुक्त होते हैं।
  • आयोग के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक समिति की सलाह पर की जाती है।

योग्यता :-

आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों को विधि, विज्ञान व तकनीकी, सामाजिक सेवा प्रबंधन पत्रकारिता प्रशासन आदि का अनुभव होना चाहिए।

कार्यकाल:-

  • 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु जो भी पहले हो।
  • पुनः निर्वाचन के योग्य नहीं होते।
  • राष्ट्रपति को त्यागपत्र देकर पद मुक्त हो सकते हैं।
  • कदाचार या अक्षमता के आधार पर राष्ट्रपति मुख्य सूचना आयुक्त व अन्य सूचना आयुक्त को हटा सकता है लेकिन इसके लिए उच्चतम न्यायालय की जांच आवश्यक है।

कार्य :-

आयोग का मुख्य कार्य किसी भी व्यक्ति द्वारा मांगी गई सूचना, जानकारी या शिकायतों का निराकरण करना है।
भारत के पहले सूचना आयोग के अध्यक्ष वजाहत हबीबुल्ला थे।


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