लोकसभा - भारतीय संसद ( The Parliament )
Image Source : bbc.com


लोकसभा 

लोकसभा को संसद का प्रथम सदन, निम्न सदन, अस्थायी सदन एवं लोकप्रिय सदन कहा जाता है। यह देश की संपूर्ण जनता का प्रतिनिधित्व करता है।

संरचना:-

  • लोकसभा का गठन 6 मई 1952 को हुआ। इसमें अधिकतम 552 सदस्य हो सकते हैं वर्तमान में इसमें 545 सदस्य है। अनुच्छेद 80(1) के अनुसार इसमें सन 2026 तक कोई परिवर्तन नहीं हो सकता। लोकसभा में राज्यों से 530 सदस्य निर्वाचित होते हैं तथा केंद्र शासित प्रदेशों से अधिकतम 20 सदस्य एवं 2 सदस्य एंग्लो इंडियन राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं। मूल संविधान में लोकसभा की सदस्य संख्या 500 निर्धारित की गई थी लेकिन गोवा, दमन और दीव, पुनर्गठन अधिनियम 1987 द्वारा लोकसभा की सदस्य संख्या अधिकतम 552 हो सकती है। 

लोकसभा में सीटों का स्वरूप:-

  • सामान्य निर्वाचन क्षेत्र - 423
  • अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित - 79
  • अनुसूचित जनजाति के लिए - 41
  • आंग्ल भारतीय मनोनयन - 2

कार्यकाल:- 5 वर्ष (सदस्यों एवं दोनों सदन का)-

  • आपातकाल में एक बार में एक वर्ष बढ़ाया जा सकता है। 42वें संविधान संशोधन 1976 द्वारा लोकसभा का कार्यकाल 6 वर्ष कर दिया गया था किंतु 44वें संविधान संशोधन 1978 में पुनः 5 वर्ष कर दिया गया।

योग्यताएँ:-

  • भारत का नागरिक हो
  • 25 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हो
  • संसद द्वारा निर्धारित अन्य योग्यताएं
त्यागपत्र - अध्यक्ष उपाध्यक्ष को एवं उपाध्यक्ष अध्यक्ष को तथा सदस्य अध्यक्ष को त्यागपत्र देते हैं।

पदच्युति:-

  • यदि कोई व्यक्ति दोनों सदनों में निर्वाचित हो जाता है तो उसे 10 दिन के अंदर अपनी पसंद बतानी होगी अन्यथा राज्यसभा की सदस्यता समाप्त हो जाएगी। संसद एवं राज्य विधान सभा की सदस्यता एक ही समय में होने पर 14 दिन के अंदर विधानसभा से त्याग पत्र देना होगा अन्यथा संसद की सदस्यता समाप्त हो जाएगी।

अयोग्यता:-

  • कोई सदस्य बिना अनुमति के 60 दिन से अधिक अनुपस्थित रहे तो अध्यक्ष की अनुमति से उसका पद स्वतः समाप्त हो जाता है। दलबदल के प्रावधान के तहत यदि कोई निर्दलीय सांसद जीतने के पश्चात किसी दल की सदस्यता ग्रहण कर ले तो उसका पद रिक्त हो जाता है।

लोकसभा अध्यक्ष:-

  • लोकसभा अध्यक्ष का वर्णन अनुच्छेद 93 में है।
  • लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव लोकसभा के सदस्यों द्वारा अपने में से बहुमत के आधार पर किया जाता है।
  • लोकसभा अध्यक्ष का वेतन उपराष्ट्रपति के बराबर होता है।
चुनाव प्रक्रिया:-  पिछली लोकसभा का अध्यक्ष लोकसभा की प्रथम बैठक तक अपने पद पर बना रहता है। इसके हटने के पश्चात राष्ट्रपति सबसे बुजुर्ग सदस्य को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त करता है, जिसका प्रमुख कार्य नवनिर्वाचित लोगों को शपथ दिलाना है।
  • प्रोटेम स्पीकर को शपथ राष्ट्रपति दिलवाता है।
  • प्रोटेम स्पीकर सदस्यों से अध्यक्ष चुनने को कहता है चयन के पश्चात् प्रोटेम स्पीकर अपने पद से त्यागपत्र दे देता है।
  • परंपरानुसार लोकसभा अध्यक्ष सत्ता पक्ष से होता है।
  • अध्यक्ष सांसद के रूप में शपथ लेता है लोकसभा अध्यक्ष के रूप में नहीं।

पदच्युति:-

  • उपाध्यक्ष को अपना त्यागपत्र देकर
  • यदि वह सदन का सदस्य न रहे
  • तत्कालीन सदस्य संख्या के बहुमत द्वारा संकल्प पारित करके।

शक्ति एवं कार्य:-

  • कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं इसका निर्णय लोकसभा अध्यक्ष करता है। दल बदल से संबंधित विवाद को सुलझाता है। निर्णायक मत देने का अधिकार तथा लोकसभा के महासचिव का चयन करता है।

लोकसभा की विशेष शक्तियाँ:-

धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है। अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा में ही पेश किया जाता है एवं लोकसभा ही पारित करती है। केंद्रीय मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होता है।



Post a Comment

If you have any doubts, Please let me know

नया पेज पुराने