राज्यसभा -  भारतीय संसद
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राज्यसभा 

यह संसद का उच्च सदन है इसे द्वितीय सदन, वरिष्ठ सदन, स्थाई सदन एवं विद्वानों का सदन भी कहते हैं। राज्यसभा का प्रारंभ भारत सरकार अधिनियम 1919 से माना जा सकता है जिसमें एक द्वितीय सदन राज्य परिषद का गठन किया गया। 23 अगस्त 1954 को राज्य परिषद का नाम राज्यसभा कर दिया गया। विश्व का सबसे शक्तिशाली द्वितीय सदन सीनेट अमेरिका का तथा सबसे कमजोर द्वितीय सदन लार्ड सभा ब्रिटेन का है।

अनुच्छेद 80 (1) राज्य सभा का गठन-

  • राज्य सभा का गठन 3 अप्रैल 1952 को हुआ। जिसमें अधिकतम सदस्य 250 हो सकते हैं लेकिन वर्तमान में 245 सदस्य है।
  • - 229 सदस्य राज्यों से
  • - 4 केंद्र शासित प्रदेशों से (तीन दिल्ली से, एक पांडुचेरी से )
  • - 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत
  • राज्यसभा भारतीय संसद का स्थाई सदन है।
  • इसका कभी विघटन नहीं होता।
  • राज्यसभा में राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों से अधिकतम 238 सदस्य निर्वाचित किए जा सकते हैं लेकिन वर्तमान में 233 सदस्य ही निर्वाचित होकर आ रहे हैं।
  • अनुच्छेद 80 के तहत राष्ट्रपति राज्यसभा में साहित्य, कला,  विज्ञान, समाज सेवा आदि क्षेत्रों से 12 सदस्यों को मनोनीत करता है।
  • परिसीमन के पश्चात 1971 की जनगणना के आधार पर राज्यसभा की सीटें निर्धारित हैं 2026 तक परिसीमन स्थगित।
  • राज्यसभा की प्रथम बैठक 13 मई 1952 को हुई ।

कार्यकाल-

  • सदस्यों का 6 वर्ष
  • प्रत्येक 2 वर्ष में 1/3 सदस्य पद मुक्त हो जाते हैं ।
  • मूल संविधान में सदस्यों का कार्यकाल निर्धारित नहीं था।
  • संसद ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के आधार पर 6 वर्ष निर्धारित किया।

योग्यताएं -

  • भारत का नागरिक हो
  • 30 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हो।
  • उसे तृतीय अनुसूची में वर्णित शपथ लेनी होगी।

अन्य योग्यताएं-

  • राज्यसभा के लिए व्यक्ति को उसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का पंजीकृत मतदाता होना चाहिए जहां से चुनाव में प्रत्याशी बनाना है (वर्तमान में इसे हटा दिया है)

त्याग पत्र -

  • राज्यसभा के सदस्य त्यागपत्र उपराष्ट्रपति को देते हैं। भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है। राज्यसभा अपने में से एक उपसभापति भी निर्वाचित करती है। सभापति की अनुपस्थिति में उपसभापति एवं उपसभापति की अनुपस्थिति में राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त सदस्य इस पद का निर्वहन करेगा।

उपसभापति-

  • राज्यसभा में उपसभापति का चुनाव राज्यसभा के सदस्यों से होता है। उपसभापति सभापति की अनुपस्थिति में उनके कृत्यों  को निर्वाह करता है। 14 मई 2002 को संसद द्वारा पारित विधेयक के अनुसार उपसभापति को केंद्रीय राज्यमंत्री के समान भत्ता देने का प्रावधान किया गया है। जब सभापति व उपसभापति दोनों अनुपस्थित हो तो राज्यसभा के सभापति के कृतियों का निर्वाहन उस राज्य सभा सदस्य के द्वारा किया जाएगा जिसका नाम राष्ट्रपति निर्देशित करें।

वेतन और भत्ते -

  • अनुच्छेद 97 के अनुसार संसद, विधि तथा नियत करें, वह संचित निधि से दिया जाएगा।

कार्य और शक्तियां-

संविधान द्वारा राज्यसभा और लोकसभा को अधिकतर मामलों में समान कार्य तथा समान शक्तियां प्राप्त है किंतु मुख्य शक्तियां निम्न है-
  • यदि राज्यसभा का कोई सदस्य बना सदन की आज्ञा से 60 दिन लगातार उसके सभी अधिवेशनो में अनुपस्थित रहे तो उसकी सदस्यता समाप्त कर दी जाती है।
  • अनुच्छेद 249 के अनुसार यदि राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो तिहाई बहुमत से संकल्प पारित कर दें कि राष्ट्रीय हित में आवश्यक है संसद राज्य सूची में वर्णित किसी विषय के संबंध में कानून बनाये। इस प्रकार बनाया गया कानून 1 वर्ष की अवधि तक तथा बाद में पुनः संकल्प के द्वारा बढ़ाया जा सकता है।
इस प्रकार के अधिनियम का प्रयोग 1952 तथा 1986 में किया जा चुका है। अखिल भारतीय सेवाओं की व्यवस्था-अनुच्छेद 312 के अनुसार राज्य सभा संघ राज्यों के लिए सम्मिलित एक से अधिक भारतीय सेवाओं का सृजन कर सकती है।

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