Judiciary System in India

Indian Judiciary - न्यायपालिका

Supreme Court (उच्चतम न्यायालय):-

अनुच्छेद-124 (Article-124):-
भारत में एक 'उच्चतम न्यायालय' होगा जो एक मुख्य न्यायाधीश तथा अन्य न्यायाधीशों से मिलकर बनेगा। जिसका निर्धारण संसद करेगी।
वर्तमान में एससी में एक मुख्य न्यायाधीश तथा 30 अन्य न्यायाधीश है (कुल 31)
प्रथम मुख्य न्यायाधीश - हीरालाल जे. कानिया (First Chief Justice of Supreme Court)
नियुक्ति - भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति वरिष्ठता के आधार पर तथा सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति कॉलेजियम प्रणाली के आधार पर मुख्य न्यायाधीश करता है।
कार्यकाल - 65 वर्ष की आयु तक
त्याग पत्र - राष्ट्रपति को
योग्यता -
  • भारत का नागरिक हो।
  • हाईकोर्ट में 5 वर्ष तक न्यायाधीश या हाई कोर्ट में 10 वर्ष तक अधिवक्ता के रूप में रहा हो या राष्ट्रपति की नजर में कानून विशेषज्ञ हो।
पद से हटाना - संसद द्वारा विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव के पश्चात राष्ट्रपति के द्वारा।
तदर्थ न्यायाधीश (Adhoc) - सुप्रीम कोर्ट के कोरम (03) पूरा नहीं होने पर मुख्य न्यायाधीश के द्वारा राष्ट्रपति की सहमति से किसी भी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को तदर्थ न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया जा सकता है (अनुच्छेद 127)
शपथ -राष्ट्रपति के द्वारा
वेतन -
  • मुख्य न्यायाधीश - ₹1 लाख
  • अन्य न्यायाधीश - ₹90,000

Powers and Functions of Supreme Court (सुप्रीम कोर्ट के कार्य (शक्तियां):-

  • उच्चतम न्यायालय की शक्तियों को निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है।

Original Jurisdiction of Supreme Court (मूल क्षेत्राधिकार):-

  • केंद्र व 1 राज्य के बीच विवाद
  • केंद्र और राज्यों के समूह का विवाद
  • दो या अधिक राज्यों के बीच का विवाद

Supreme Court Justices Jurisdiction (न्यायाधीश क्षेत्राधिकार):-

  • यह नागरिकों के मूल अधिकारों का संरक्षण होता है।
  • इसके लिए निम्न पांच प्रकार है -
  1.   बंदी प्रत्यक्षीकरण,
  2.   परमादेश
  3.   प्रतिशेध
  4.   उत्प्रेषण
  5.   अधिकार पृच्छा
  • इसमें पूछा जाता है कि अधीनस्थ ने किस अधिकार के तहत यह कार्य किया है।

Review Jurisdiction (पुनर्विचार क्षेत्राधिकार):-

  • इसके तहत उच्चतम न्यायालय निचली अदालत के फैसलो के खिलाफ सुनवाई करता है।

Advisory Jurisdiction of Supreme Court (सलाहकार क्षेत्राधिकार):-

  • इसका वर्णन अनुच्छेद 143 में है जो कि राष्ट्रपति को सलाह देने से संबंधित है।

अभिलेख की अदालत -

  • सुप्रीम कोर्ट में अपने अवमानना के लिए दंड देने सहित अभिलेख के अंतर्गत न्यायालय की सभी शक्तियां होंगी।

न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति -

  • इसके तहत न्यायालय किसी भी निर्णय नियम, कानून की न्यायिक समीक्षा करता है।

उच्च न्यायालय (High Court) 

इसका वर्णन भाग - 6 में है।

अनुच्छेद-214 (Article-214):-

  • प्रत्येक राज्य में एक उच्च न्यायालय होगा, जो राज्य का सबसे बड़ा न्यायालय होगा।

Constitution of High Court (गठन):-

  • प्रत्येक उच्च न्यायालय का गठन एक मुख्य न्यायाधीश तथा ऐसे अन्य न्यायाधीशों को मिलाकर किया जाता है जिन्हें राष्ट्रपति समय-समय पर नियुक्त करें। इस प्रकार भिन्न-भिन्न उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की संख्या भी भिन्न है।

Qualification of High Court Judges (न्यायाधीशों की योग्यता):-

अनुच्छेद-217 (नियुक्ति) के अनुसार कोई व्यक्ति किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के योग्य तब होगा, जब वह -

  • भारत का नागरिक हो और 62 वर्ष की आयु पूरी न की हो।
  • कम से कम 10 वर्ष तक न्यायिक पद धारण कर चुका हो। न्यायिक पद धारण करने की अवधि की गणना करने में वह अवधि भी सम्मिलित की जाएगी, जिसके दौरान कोई व्यक्ति पद धारण करने के पश्चात किसी उच्च न्यायालय का अधिवक्ता रहा है या उसने किसी अधिकरण के सदस्य का पद धारण किया है या संघ अथवा राज्य के अधीन कोई ऐसा पद धारण किया है, जिसके लिए विधि का विशेष ज्ञान अपेक्षित है।
  • किसी उच्च न्यायालय में एक या एक से अधिक उच्च न्यायालयों में लगातार 10 वर्षों तक अधिवक्ता रहा हो। किसी उच्च न्यायालय का अधिवक्ता रहने की अवधि की गणना करते समय वह अवधि भी सम्मिलित की जाएगी, जिसके दौरान किसी व्यक्ति ने अधिवक्ता होने के पश्चात न्यायिक पद धारण किया है या किसी अधिकरण के सदस्य का पद धारण किया है या संघ अथवा राज्य के अधीन कोई ऐसा पद धारण किया है, जिसके लिए विधि का विशेष ज्ञान अपेक्षित है।

Oath of High Court Judge (शपथ ग्रहण (अनुच्छेद-219):-

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को उस राज्य, जिसमें उच्च न्यायालय स्थित है, का राज्यपाल उसके पद की शपथ दिलाता है।
त्याग पत्र - राष्ट्रपति को
पदावधि -
  • उच्च न्यायालय का न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु पूरी करने तक अपना पद धारण कर सकता है। परंतु वह किसी भी समय राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र दे सकता है। यदि त्यागपत्र में उस तिथि का उल्लेख किया गया है, जिस तिथि से त्यागपत्र लागू होगा, तो न्यायाधीश किसी भी समय अपना त्याग पत्र वापस ले सकता है।
  • इसके अतिरिक्त न्यायाधीश को साबित कदाचार कथा असमर्थता के आधार पर संसद द्वारा दो तिहाई बहुमत से पारित महाभियोग प्रस्ताव के द्वारा राष्ट्रपति द्वारा उसके पद से हटाया जा सकता है।
High Court Judge Salary (वेतन):-
  • मुख्य न्यायाधीश - ₹ 90,000
  • अन्य न्यायाधीश - ₹80,000

Jurisdiction of High Court (उच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार):-

High Court Appellate Jurisdiction (अपीलीय क्षेत्राधिकार):-

  •  उच्च न्यायालय को अपने अधीनस्थ सभी न्यायालयों तथा न्यायाधिकरणो के निर्णयो, आदेशों तथा डिक्रियो के विरुद्ध अपील सुनने का अधिकार है।

High Court Original Jurisdiction (प्रारंभिक क्षेत्राधिकार):-

  •  उच्च न्यायालय को राजस्व तथा संग्रह के संबंध में मूल अधिकारों के उल्लंघन के मामले में प्रारंभिक क्षेत्राधिकार है।

अंतरण संबंधी क्षेत्राधिकार:-

  • यदि उच्च न्यायालय को यह समाधान हो जाए कि उसके अधीनस्त किसी न्यायालय में लंबित किसी मामले में संविधान की व्याख्या के बारे में कोई प्रश्न न्यायालय के विचाराधीन है,  जिसका उसे मामले से संबंध है, तो वह उस मामले को अपने पास मंगा सकता है और मामले पर निर्णय कर सकता है और निर्णय करके उस मामले को ऐसे प्रश्न पर निर्णय की प्रतिलिपि सहित उच्च न्यायालय को, जिससे मामला अंतरित किया गया था, भेजकर उस निर्णय के अनुसार मामले के निपटारे का आदेश दे सकता है।

लेख जारी करने का अधिकार:-

  • उच्च न्यायालय मूल अधिकारों के उल्लंघन के मामले में बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध,  उत्प्रेषन तथा अधिकार पृच्छा लेख जारी कर सकता है।

अधीक्षण क्षेत्राधिकार:-

⇨ प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपनी अधिकारिता के अधीन स्थित सभी न्यायालयों तथा अधिकरणो की अधीक्षक की शक्ति है,  जिसके प्रयोग में वह ऐसे न्यायालयों/ अधिकरणो -
  • से विवरणी मंगा सकता है,
  • के अधिकारियों द्वारा रखी जाने वाली प्रविष्टियों और लेखाओं के प्ररूप निश्चित कर सकता है तथा
  • के शुल्कों को नियत पर सकता है।

Subordinate Courts (अधीनस्थ न्यायालय) 

⇨ संविधान में अधीनस्थ अथवा जिला न्यायालय का प्रावधान किया गया है। उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) तथा उच्च न्यायालय (High Court) की तरह ही जिला न्यायालयों को कार्यपालिका से स्वतंत्र रखने के लिए संविधान में निम्नलिखित प्रावधान किए गए हैं -
  • जिला न्यायाधीश की नियुक्ति, तैनाती तथा पदोन्नति राज्यपाल द्वारा उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाएगी।
  • जिला न्यायाधीश से भिन्न व्यक्तियों की किसी राज्य की न्यायिक सेवा में नियुक्ति उस राज्य के राज्यपाल के द्वारा लोक सेवा आयोग तथा सम्बद्ध न्यायालय से परामर्श करके निर्मित नियमों के अनुसार की जाएगी।
  • जिला न्यायालय और उनके अधीनस्थ न्यायालयों का नियंत्रण उच्च न्यायालय में निहित है।
  • जिला न्यायाधीशों तथा उनके न्यायिक पदाधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने का अधिकार उच्च न्यायालय को ही है।
अनुच्छेद-233 - जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति
अनुच्छेद-233(क) - कुछ जिला न्यायाधीशों की नियुक्तियों का और उनके द्वारा किए गए निर्णय आदि का विधि मान्यकरण
अनुच्छेद-234 - न्यायिक सेवा में जिला न्यायाधीशों से भिन्न व्यक्तियों की भर्ती
अनुच्छेद-235 - अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण
अनुच्छेद-236 - उच्च वर्ग या वर्गों के मजिस्ट्रेटो पर इस भाग के उपबंधो पर लागू होगा।
अनुच्छेद-241 - केंद्रशासित प्रदेशों के उच्च न्यायालय 

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